Thursday, 21 May 2020

कर्मयोगी लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी। Lal Bahadur Shastri ki Biography In Hindi

कर्मयोगी लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी। Lal Bahadur Shastri ki Biography In Hindi: लाल बहादुर शास्त्री स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री एवं स्वतंत्र सेनानी थे। भारत को जय जवान, जय किसान का नारा देने वाला और साधारण जीवन जीने के लिए प्रसिद्ध लाल बहादुर शास्त्री हमारे देश के प्रधानमंत्री थे। लाल बहादुर शास्त्री ने अपने प्रधानमंत्री काल में कई ऐसे अहम फैसले उठाएं, जिसके लिए उनको ख्याति प्राप्त हुई। लाल बहादुर शास्त्री ताशकंद में उस समय से पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए दौरे पर गए हुए थे और यही ताशकंद में उनकी रहस्यमय तरीके से मौत हो गई थी। लाल बहादुर शास्त्री जी को मरणोपरांत भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय पुरस्कार भारतरत्न से सम्मानित किया गया था।


कर्मयोगी लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी। Lal Bahadur Shastri ki Biography In Hindi
कर्मयोगी लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी। Lal Bahadur Shastri ki Biography In Hindi




पूरा नाम - लाल बहादुर शारदा प्रसाद श्रीवास्तव

जन्म -2 अक्टूबर 1904 

जन्म स्थान - मोगलसराई ,जी. वाराणसी ,उत्तरप्रदेश ,भारत 

पिता - शारदा प्रसाद 

माता - राम दुलारी देवी 

शिक्षा - काशी विश्वविद्यालय से 'तत्व ज्ञान' विषय पर लेकर "शास्त्री" की उपाधि

विवाह - ललिता देवी

शास्त्री जी के नाम के साथ कर्मयोगी विशेषण जोड़ना बिल्कुल उपयुक्त है क्योंकि उनका सारा जीवन ही कर्म से भरा हुआ मालूम पड़ता है। शास्त्री जी सामान्य परिवार से ऊपर उठकर देश के प्रधानमंत्री के इस महत्वपूर्ण पद तक पहुंचे। उसका रहस्य अनेक कर्मयोगी होने में ही छिपा हुआ है। वह उन लोगों में भी नहीं थे जो भाग्य पर भरोसा करके बैठ रहे हैं और अचानक कभी सफलता मिल जाती है बल्कि भी उन लोगों में से थे जिनको अपनी हथेली की लकीरों के बजाय अपने चिंतन और कर्म की शक्ति पर अधिक भरोसा होता है और वे क्रमश अपने जीवन का रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ते हैं। शास्त्री जी के लिए कर्म ही ईश्वर था और इसके प्रति बिना किसी फल की आशा की संपूर्ण भाव से समर्पित रहते थे। यहां तक कि जब भी उन्हें फल की प्राप्ति के अवसर मिले तब भी उन्होंने उस और हमेशा उपेक्षित दृष्टि रखी उनका जीवन दर्शन 'गीता' के निष्काम कर्मयोगी का प्रतिरूप था इसलिए मैं समझाता हूं कि उन्हें केवल कर्मयोगी के बजाय निष्काम कर्मयोगी कहना अधिक उपयुक्त होगा। 


लाल बहादुर शास्त्री का शुरुआती जीवन 


लाल बहादुर शास्त्री का जन्म सन 1904 उत्तरप्रदेश की मुगलसराय में हुआ था। उनके पिता का नाम मुंशी  शारदा प्रसाद और माता का नाम रामदुलारी था। शास्त्री जी के पिता एक  प्राथमिक स्कूल में शिक्षक के पद पर तैनात थे। उसके बाद उनके पिता ने राजस्व विभाग में लिपिक क्लर्क की नौकरी कर ली थी। अपने माता-पिता के सबसे छोटे बच्चे होने के कारण इन्हें प्यार से नन्हे कह कर पुकारते थे। 

जब शास्त्री जी मात्र 18 महीने के थे तब उनके पिताजी की मौत हो गई थी। तब शास्त्री के माता अपने मायके चली गई थी और अपने ननिहाल से ही शास्त्री जी ने अपने स्कूल की शिक्षा प्राप्त की। उसके बाद शास्त्री जी ने काशी विद्यापीठ से शिक्षा प्राप्त की। काशी में ही शास्त्री जी को 'शास्त्री' की मानद उपाधि मिली थी। यहीं से लाल बहादुर शास्त्री ने अपने नाम के पीछे 'शास्त्री' सर नेम लगा दिया था। शास्त्री जी की शादी 1928 में मिर्जापुर के निवासी गणेश प्रसाद की पुत्री ललिता शास्त्री के साथ हुई थी। 


लाल बहादुर शास्त्री का राजनीती  जीवन 

अपने उद्देश्य के प्रति दृढ़ आस्था उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए कर्म का भाव तथा उस कर्म के प्रति संपूर्ण समर्पण तीन बातें उनके संपूर्ण चरित्र जीवन में दिखाई पड़ती है। अपने एक भाषण में उन्होंने इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा था यहां तक कि भले ही आप राजनीति क्षेत्र या सामाजिक क्षेत्र किसी अन्य क्षेत्र में कार्य करते रहते। यदि आप उसमें सफल होना चाहते हो। अपने दायित्वों का पूरी तरह से निर्वाह करना चाहते हो तो आपके कार्य और समर्पण तथा भक्ति और कर्म में समन्वय होना चाहिए। शास्त्री जी का संपूर्ण जीवन सेवा, सादगी और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। उनके व उनके कार्य और विचारों में ही अभिव्यक्त नहीं पाते हैं बल्कि उनको देखने से ही सभी भावों का एहसास हो जाता है। उनके व्यक्तित्व में विचारों का अन्यथा वे जो कुछ कहते थे, वही करते थे जो कुछ भी करते थे। वह एकमात्र की भावना से प्रेरित होकर करते मुझे लगता है कि यह उनके चरित्र की विशेषता थी जिसके कारण देशवासी उतना अधिक विश्वास करते थे और उन्हें चाहते थे। पंडित नेहरू की राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने का काम नहीं था कि उसे संभालने की ताकत और शास्त्री जी ने अपने संकल्प शक्ति द्वारा देश की आकांक्षा को पूरा किया 

शास्त्री जी की एक  सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे सामान्य परिवार में पैदा हुए थे। सामान्य परिवार में ही उनकी परवरिश हुई और जब वे देश के प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर पहुंचे तब भी व सामान्य ही बने रहे। विनम्रता सादगी सरलता उनके व्यक्तित्व में एक विशिष्ट प्रकार का आकर्षण पैदा करते थे। इस दृष्टि मे शास्त्री जी का व्यक्तित्व बापू के अधिक करीब था और कहना न होगा कि बापू से प्रभावित होकर सन 1921 में उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ छोड़ दी थी। शास्त्री जी पर भारतीय चिंतकों, डॉक्टर भगवान दास तथा बापू का कुछ ऐसा प्रभाव रहा कि वह जीवन भर उन्हें आदर्शो पर चलते रहे और इसके लिए प्रेरित करते रहें। शास्त्री जी के संबंध में मुझे बाइबिल  कि वह उक्ति बिल्कुल सही जान पड़ती है कि विनम्र ही पुथ्वी  के वारिस होंगे। 


साथ में हमारे देश की स्वतंत्रता संग्राम में प्रवेश किया। जब स्कूल में विद्यार्थी थे और उस समय उनकी उम्र 17 वर्ष की थी।  गांधी जी के आहवान पर वे स्कूल छोड़कर बाहर आ गए थे। उसके बाद काशी विद्यापीठ में उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी कि।  उनका मन हमेशा  देश की आजादी और सामाजिक कार्यों की और लगा रहा। परिणाम  यह हुआ कि सन 1926  में वे 'लोक सेवा मंडल' में शामिल हो गये जिसके वे जीवनभर सदस्य हैं। इसमें शामिल होने के बाद से शास्त्री जी ने गांधी जी के विचारों के अनुरूप अछूतों द्वार के काम में अपने आप को लगाया। क्यों से शास्त्री जी के जीवन का एक नया अध्याय प्रारंभ हो गया। सन् 1930 में जब नमक कानून तोड़ो आंदोलन शुरू हुआ तो शास्त्री जी ने उस में भाग लिया। उसके परिणाम स्वरूप उन्हें जेल जाना पड़ा। यहां से शास्त्री जी की जेल यात्रा की शुरुआत हुई। वह सन 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक निरंतर चलती रही इन 12 वर्षो के दौरान वे सात बार जेल गये। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनके अंदर देश के आजादी के लिए कितनी बड़ी ललक  थी। दूसरी जेल यात्रा सन 1932 में किसान आंदोलन में भाग लेने के लिए करनी पड़ी। 1942 की उनकी जेल यात्रा 3 वर्ष की थी ,जो सबसे लम्बी थी।


उस दौरान शास्त्री जी जहां एक और गांधी जी द्वारा बताए गए रचनात्मक कार्यों में लगे हुए थे वहीं दूसरी और पदाधिकारी के रूप में जन सेवा के कार्यों में भी लगे रहे। सन् 1935 में भी संयुक्त प्रांतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव बनाए गए। इस पद पर वे 1938 तक रहे किसानों के प्रति उनके मन में विशेष लगाव होता है। इसलिए उनको सन 1936 में किसानों की दशा का अध्ययन करने वाली कमेटी अध्यक्ष बनाया गया। पूरी लगन के साथ काम करके उन्होंने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें जमीदारी उन्मूलन पर विशेष जोर दिया गया। 



वे  हमारे देश की अत्यंत महत्वपूर्ण पदों पर रहे और इन पदों पर रहते हुए स्वाभाविक रूप से भी अधिकार संपन्न भी थे। लेकिन उन्होंने हमेशा आत्मसंयम के साथ काम लिया और अधिकारियों के अधिक कर्तव्य की तरह दी। शायद इसलिए शास्त्री जी की उसने अधिक लोकप्रिय भी हो सके। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 19 दिसंबर, 1964 को छात्रों को संबोधित करते हुए कुछ इसी तरह के विचार व्यक्त किए थे। आपके भविष्य की मंजिल चाहे जो कुछ भी हो, आप में से प्रत्येक को यह सोचना चाहिए कि आप सबसे पहले देश के नागरिक हैं। यह आप को संविधान द्वारा प्रदत कुछ अधिकार देता है, लेकिन इससे कुछ कर्तव्यों का भी हो जाता है जिसे समझना चाहिए। हमारा देश प्रजातांत्रिक है जो निजी स्वतंत्रता देता है, लेकिन स्वतंत्रा का उपयोग एक व्यवस्थित समाज के हित में लगाए गए प्रतिबंधों के तहत होना चाहिए। अधिकार कर्तव्य संयम के बारे में यह महत्वपूर्ण शास्त्री जी ने कही थी जिसे आज याद रखने की जरूरत है।


लाल बहादुर शास्त्री का मोत और रहस्य  


भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत रूस के ताशकंद शहर में हुई थी। एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ घंटे के बाद शास्त्री जी की अचानक रहस्यमई तरीके से मौत हो गई थी। उनका पार्थिव शरीर को भारत लाया गया और दिल्ली के यमुना नदी के तट पर अंतिम संस्कार किया गया और इस स्थल को विजय घाट दिया गया। 


उनकी मौत के कुछ समय तक गुलजारीलाल नंदा को कार्यकारी  प्रधानमंत्री बनाया गया था। उसके बाद इंदिरा गांधी को बाद में भारत का प्रधानमंत्री बनाया गया था। शास्त्री जी की मौत हार्ट अटैक से हुई थी या किसी दूसरे कारण से याह रूस के डॉक्टर, खुफिया एजेंसी और भारत की खुफिया एजेंसी को समझ नहीं आया। सन 1966 से वर्तमान तक शास्त्रीजी की मौत एक रहस्य ही बन चुकी है ।

निष्कर्ष 

दोस्तों इस पोस्ट में कर्मयोगी लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी। Lal Bahadur Shastri ki Biography In Hindi इसके बारे में सबसे बढ़िया जानकारी दी है। उम्मीद करता हूं इस पोस्ट आपको  यूज़फुल(Useful) होगी। अगर आपको इस पोस्ट पसंद आए तो अपने मित्रों के सोशल मीडिया में जरूर से शेयर करना है। जैसे व्हाट्सएप टि्वटर फेसबुक पर अगर आपको कोई समस्या आती है तो मुझे कमेंट जरुर करना मैं आपको जवाब दे दूंगा। जय हिंद जय भारत।

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